पत्रकारों पर हमलों के विरोध में सड़कों पर उतरे पत्रकार, कलेक्टर को सौंपा 5 सूत्रीय ज्ञापन
दिल्ली में पत्रकारों के साथ मारपीट के विरोध में निकाली विशाल रैली, चेतावनी—पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करो, वरना होगा ‘कुर्सी छोड़ो आंदोलन’
बड़वानी। दिल्ली में पत्रकारों के साथ हुई मारपीट और लगातार बढ़ते पत्रकारों पर हमलों के विरोध में शुक्रवार को अखिल भारतीय ग्रामीण पत्रकार संघ भारत एवं ऑल मीडिया फ्रेंड्स हेल्प ग्रुप सेंधवा के संयुक्त तत्वावधान में पत्रकारों ने विशाल रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पत्रकारों ने एकजुटता दिखाते हुए शासन-प्रशासन के नाम कलेक्टर को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
रैली कोर्ट चौराहे से प्रारंभ होकर झंडा चौक, एमजी रोड, करेजा चौराहा और अंजड़ नाका होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची। यहां पत्रकारों ने पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों से जुड़ी मांगों को प्रमुखता से उठाया।
ज्ञापन में कहा गया कि देश की आजादी के 78 वर्ष बाद भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी पत्रकारिता से जुड़े लोगों को पर्याप्त सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकार सीमित संसाधनों में 300 से 400 किलोमीटर तक मोटरसाइकिल चलाकर समाचार संकलन करते हैं और शासन-प्रशासन की योजनाओं को आमजन तक पहुंचाते हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो नियमित वेतन मिलता है और न ही पेंशन की सुविधा। सच्चाई उजागर करने पर कई बार पत्रकारों को धमकियों, मारपीट और झूठे मुकदमों का सामना करना पड़ता है।
दिल्ली में पत्रकारों पर हमलों का किया विरोध
ज्ञापन में जुलाई से अक्टूबर 2026 के बीच दिल्ली में पत्रकारों के साथ हुई कथित घटनाओं का उल्लेख किया गया। इसमें टाइम्स नाउ के पत्रकार देव कोटक पर हमला, संसद मार्ग पर एबीपी न्यूज की टीम पर पथराव, ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों के साथ अभद्रता तथा कनॉट प्लेस में कैमरामैन पर जानलेवा हमले जैसी घटनाओं पर चिंता जताई गई। पत्रकारों ने कहा कि ऐसी घटनाएं लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
पांच सूत्रीय मांगों में उठाए पत्रकारों के अधिकार
ज्ञापन में प्रमुख रूप से पत्रकारों के साथ मारपीट और अभद्रता करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने, पत्रकारों एवं उनके परिवारों को आर्थिक सहायता, मेडिकल बीमा, शिक्षा और आवास संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी गई।
इसके अलावा ग्रामीण पत्रकारों के लिए विशेष सुविधाएं, अधिमान्यता का सरलीकरण, सामाजिक सुरक्षा एवं आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने तथा छोटे समाचार पत्रों, क्षेत्रीय मीडिया और डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकारों को सरकारी विज्ञापन एवं अनुदान में उचित अवसर देने की मांग भी उठाई गई।
पत्रकारों ने महाराष्ट्र की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी विशेष पत्रकार सुरक्षा अधिनियम लागू करने की मांग करते हुए कहा कि पत्रकारों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पत्रकारों और उनके आश्रित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता, चिकित्सा एवं अन्य कल्याणकारी योजनाएं लागू की जाएं।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
पत्रकार संगठनों ने शासन-प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पत्रकारों की पांच सूत्रीय न्यायोचित मांगों पर गंभीरता से विचार कर उनका निराकरण नहीं किया गया, तो जिला और ग्रामीण स्तर तक आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर प्रदेशव्यापी ‘कुर्सी छोड़ो आंदोलन’ भी किया जाएगा।
पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी स्वतंत्रता एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी शासन की है। इस अवसर पर पत्रकारों ने नारा बुलंद किया— “कलम चलेगी तो सिस्टम हिलेगा, पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करो, वरना कुर्सी छोड़ दो।”
आयोजक संगठनों ने पत्रकारों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट रहने और अपने अधिकारों की लड़ाई में सहभागी बनने का आह्वान किया।


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