मुख्यमंत्री जी आदेश की अवहेलना नर्मदा पट्टी में शराबबंदी बेअसर? प्रतिबंधित क्षेत्र में खुलेआम शराब का परिवहन, किराना दुकानों तक पहुंच रही शराब
मध्यप्रदेश में नर्मदा तट से जुड़े क्षेत्रों में शराब बंदी को लेकर सरकार की नीति साफ है, लेकिन जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
धामनोद क्षेत्र में नर्मदा पट्टी के गांवों में कथित तौर पर शराब का अवैध परिवहन लगातार जारी है। हालात यह हैं कि गांवों की छोटी-छोटी किराना दुकानों तक शराब पहुंचने के आरोप सामने आ रहे हैं।
सवाल यह है कि अगर शराब प्रतिबंधित क्षेत्र में शराब पहुंच रही है, तो आखिर यह शराब आ कहां से रही है और इसे रोकने की जिम्मेदारी जिन विभागों की है, उनकी निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
नर्मदा पट्टी के कई गांवों में शराबबंदी के बावजूद शराब की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।पूर्व मै भी ग्रामीण कर चुके शिकायत
स्थानीय स्तर पर लोगों का आरोप है कि शराब का परिवहन दूसरे क्षेत्रों से किया जा रहा है और गांवों में छोटे स्तर पर इसकी बिक्री की जा रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि
कथित तौर पर कुछ छोटी किराना दुकानों से भी शराब उपलब्ध कराई जा रही है।
यानी जिस शराब की बिक्री अधिकृत शराब दुकान के अलावा नहीं होनी चाहिए, वह गांव की सामान्य दुकानों तक कैसे पहुंच रही है?
उठ रहे बड़े सवाल
* प्रतिबंधित नर्मदा क्षेत्र में शराब की सप्लाई आखिर कहां से हो रही है?
* शराब परिवहन करने वाले वाहनों की जांच कितनी गंभीरता से हो रही है?
* गांवों में अवैध शराब बेचने वालों पर कितनी कार्रवाई हुई?
* क्या आबकारी विभाग को गांवों में शराब बिक्री की जानकारी नहीं है?
* छोटी किराना दुकानों में शराब पहुंचने के पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है?
* शराब की अवैध बिक्री से शासन को राजस्व का कितना नुकसान हो रहा है?
* क्या प्रतिबंधित क्षेत्र में नियमित आबकारी गश्त और जांच हो रही है?
प्रशासन से सवाल
अगर नर्मदा पट्टी में शराब प्रतिबंध लागू है, तो फिर गांवों में शराब की उपलब्धता कैसे बनी हुई है?
क्या शराबबंदी केवल कागजों तक सीमित है या प्रशासन वास्तव में जमीन पर भी इसे लागू कर रहा है
अब जरूरत है कि आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से प्रतिबंधित क्षेत्र में आने-जाने वाले संदिग्ध वाहनों, अवैध शराब के भंडारण और छोटे दुकानदारों के माध्यम से होने वाली बिक्री की निष्पक्ष जांच करे।
जनता की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में अवैध शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगनी चाहिए और यदि किसी दुकान या व्यक्ति द्वारा अवैध शराब का कारोबार किया जा रहा है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—
जब क्षेत्र में शराब प्रतिबंधित है, तो फिर गांव-गांव तक शराब पहुंच कौन रहा है?


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