पत्रकार पर जानलेवा हमला, फिर भी मेहरबान पुलिस!आरोपियों को बचाने के आरोपों से घिरी कार्रवाईकार से कुचलने का आरोप, गंभीर चोटें आईं... लेकिन FIR में नहीं दिखी गंभीरता; प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
धामनोद//लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला हो और कानून के रखवाले ही सवालों के घेरे में आ जाएं, तो व्यवस्था पर विश्वास डगमगाना स्वाभाविक है। नगर समीप ग्राम धनी के पत्रकार मोनू मीणा द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए शिकायत पत्र ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पत्रकार पर कथित जानलेवा हमले के बावजूद पुलिस ने आरोपियों को संरक्षण देते हुए मामले को सामान्य धाराओं में दर्ज कर दिया।
शिकायत के अनुसार 16 जुलाई को पत्रकार मोनू मीणा एवं उनके साथी ढाबे पर भोजन कर रहे थे। इसी दौरान विवाद के बाद कुछ लोगों ने कथित रूप से पहले अभद्रता और धमकी दी, फिर बाद में कार से टक्कर मारकर जान लेने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस घटना में उन्हें और उनके साथी को गंभीर चोटें आईं तथा उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
आरोपियों को पकड़ा, फिर भी नरमी क्यों?
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि घटना के बाद मौजूद लोगों ने आरोपियों को पकड़ लिया था, लेकिन बाद में प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप और दबाव के चलते पुलिस ने गंभीर धाराओं में कार्रवाई करने के बजाय सामान्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी थी कि कथित जानलेवा हमले को साधारण अपराध की तरह दर्ज किया गया?
*पत्रकार ने उठाए पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल –*
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा है कि मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटों का उल्लेख होने के बावजूद हत्या के प्रयास और गंभीर चोट संबंधी धाराएं नहीं जोड़ी गईं। आवेदन में आरोप है कि इससे आरोपियों को लाभ पहुंचा और न्यायिक प्रक्रिया कमजोर हुई।
चौथे स्तंभ की सुरक्षा पर भी सवाल
पत्रकार पर हमले की घटना ने प्रेस जगत में भी चिंता बढ़ा दी है। शिकायत में कहा गया है कि यदि पत्रकारों पर हमले के मामलों में भी निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
शिकायत के बाद उठे बड़े सवाल
🔹 पत्रकार पर कथित जानलेवा हमला हुआ या नहीं?
🔹 मेडिकल रिपोर्ट में चोटें गंभीर हैं तो धाराएं सामान्य क्यों?
🔹 पकड़े गए आरोपियों को राहत किसके दबाव में मिली?
🔹 क्या जांच को प्रभावशाली लोगों ने प्रभावित किया?
🔹 वरिष्ठ अधिकारी शिकायत की निष्पक्ष जांच कराएंगे या नहीं?
*धामनोद में चर्चा का विषय बनी शिकायत –*
पत्रकार द्वारा जिला प्रशासन को दिए गए इस शिकायत पत्र ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब निगाहें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर सच्चाई सामने लाते हैं या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाता है।




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