"शहादत की याद में सेवा का संकल्प"गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर छबील लगाकर बांटा शरबत और चने का प्रसाद
धामनोद। सिखों के पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस गुरुवार को स्थानीय गुरुद्वारे में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारे में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा संगत द्वारा सेवा कार्य किए गए।
शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में पिछले 10 दिनों से गुरुद्वारे में सुखमणि साहिब का पाठ किया जा रहा था। गुरुवार सुबह पाठ की समाप्ति के बाद कीर्तन हुआ और ज्ञानी रंजीत सिंह ने अरदास की। इसके पश्चात गुरुद्वारे के बाहर श्रद्धालुओं एवं राहगीरों के लिए ठंडे शरबत (छबील) और चने के प्रसाद का वितरण किया गया।
भीषण गर्मी को देखते हुए समाज के लोगों ने सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों को रोककर शरबत पिलाया। उमस भरे मौसम में ठंडा शरबत पाकर लोगों ने राहत महसूस की और सेवा कार्य की सराहना की।
इस अवसर पर वक्ताओं ने बताया कि गुरु अर्जुन देव जी सिखों के प्रथम शहीद गुरु थे। उन्होंने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अनेक यातनाएं सहन कीं, लेकिन धैर्य और शांति का मार्ग नहीं छोड़ा। उनकी स्मृति में शहीदी दिवस पर छबील लगाकर लोगों को शीतलता और सेवा का संदेश दिया जाता है।
कार्यक्रम में सुरेश सिंह छाबड़ा, राजू सलूजा, सोनू गांधी, मोनू सलूजा, कपिल छाबड़ा, लवी छाबड़ा, इंदर पाल सिंह, कुणाल छाबड़ा, सरबजीत सिंह, अरबिंद पत्तरवाला, अवी पाल, मनीष टहेलरामानी, मनीष छाबड़ा, वीरू, यशी सलूजा, हर्ष सलूजा सहित सिख एवं सिंधी समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।


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