खदानों की गहराई का हिसाब नहीं, बंद खदानों में मौत के गड्ढे! निमोला की गिट्टी खदान को लेकर शिकायतकर्ता असंतुष्ट, लीज की शर्तों से लेकर सुरक्षा इंतजामों तक पर उठे सवाल; आखिर कब जागेगा खनिज विभाग? - Sammukh bharat news

News in Hindi(हिन्दी में समाचार), Hindi News(हिंदी समाचार): देश के सबसे विश्वसनीय अख़बार पर पढ़ें ताज़ा ख़बरें। पढ़ें देश, विदेश, बॉलीवुड, ...


Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Monday, 2 November 2026

खदानों की गहराई का हिसाब नहीं, बंद खदानों में मौत के गड्ढे! निमोला की गिट्टी खदान को लेकर शिकायतकर्ता असंतुष्ट, लीज की शर्तों से लेकर सुरक्षा इंतजामों तक पर उठे सवाल; आखिर कब जागेगा खनिज विभाग?

 खदानों की गहराई का हिसाब नहीं, बंद खदानों में मौत के गड्ढे! निमोला की गिट्टी खदान को लेकर शिकायतकर्ता असंतुष्ट, लीज की शर्तों से लेकर सुरक्षा इंतजामों तक पर उठे सवाल; आखिर कब जागेगा खनिज विभाग?


धामनोद । धार जिले के धरमपुरी तहसील के ग्राम निमोला में गिट्टी खदानों के संचालन और लीज समाप्त होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम निमोला की गिट्टी खदान जिसका संचालन ठेकेदार कामरान पिता इकबाल खान के द्वारा किया जा रहा है । इस खदान में चल रही अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद भी शिकायतकर्ता की संतुष्टि नहीं होने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता अक्षय वास्केल ने खदान में उत्खनन, निर्धारित गहराई, पर्यावरणीय सुरक्षा और लीज समाप्त होने के बाद छोड़े गए गहरे गड्ढों के संबंध में कार्रवाई की मांग उठाई है।



*_लीज में खुदाई की अधिकतम गहराई का स्पष्ट उल्लेख कहां :–_*


         शिकायतकर्ता का सवाल है कि गिट्टी खदानों को लीज पर देते समय जमीन की सतह से कितनी गहराई तक पत्थर का उत्खनन किया जा सकता है, इसका स्पष्ट उल्लेख और जमीनी स्तर पर निगरानी कितनी प्रभावी है? खदानों में निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्खनन हो रहा है या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। इस मामले में लीज की शर्तों और स्वीकृत खनन योजना की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


*_लीज खत्म, लेकिन गड्ढे खुले तो कौन होगा जिम्मेदार :–_*


        खदानों में उत्खनन के बाद बने बड़े और गहरे गड्ढे गंभीर चिंता का विषय हैं। लीज समाप्त होने के बाद भी यदि खदानों को असुरक्षित स्थिति में छोड़ दिया जाता है और उनमें गंदा या बरसाती पानी भर जाता है, तो आसपास के ग्रामीणों, बच्चों और मवेशियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।


*_तहसील क्षेत्र में कई खदानों के गड्ढे खुले पड़े :–_*


        क्षेत्र में ऐसी कई खदानें होने का दावा किया जा रहा है, जहां गहरे गड्ढे खुले पड़े हैं। ऐसे स्थानों पर सुरक्षा घेरा, चेतावनी संकेतक और नियमानुसार पुनर्वास या समतलीकरण की व्यवस्था है या नहीं, इसकी जांच होना आवश्यक है।


*_शिकायत के बाद भी संतुष्टि नहीं, जांच पर सवाल :–_*


       ग्राम निमोला के अक्षय वास्केल ने खदान से संबंधित अनियमितताओं को लेकर शिकायत की है। उपलब्ध शिकायत पत्रों में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), भोपाल से प्राप्त शिकायत को जिला प्रशासन तक भेजे जाने तथा खदान की स्वीकृति और पर्यावरणीय मानकों से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि माइनिंग विभाग के अधिकारी संदेश पिपलोदिया द्वारा जांच में कई बिंदुओं को नजर अंदाज किया है । गड्ढों की गहराई तक की जाँच नहीं करना । रायल्टी कितनी जमा कराई और अभी तक कितने घनमीटर उत्खनन किया राजस्व का कितना नुकसान हुआ । ऐसे कई बिंदु है जिसके चलते शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हुआ । अधिकारी कि कार्रवाई पर कहीं न कहीं सवालिया निशान भी लगते दिखाई दे रही है ।


शिकायत में घनी आबादी के निकट खनन, ब्लास्टिंग से उड़ने वाली धूल, कंपन और संभावित नुकसान के साथ वित्तीय अनियमितताओं की आशंकाएं भी व्यक्त की गई हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है।


*_खनिज विभाग की जवाबदेही तय होनी चाहिए :–_*


        मामले में जिला प्रशासन और खनिज विभाग को संबंधित खदान की लीज, स्वीकृत खनन योजना, निर्धारित गहराई, पर्यावरणीय अनुमति, सुरक्षा इंतजाम तथा लीज समाप्त होने के बाद की स्थिति की जांच करनी चाहिए। यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो नियमानुसार जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।


       सबसे बड़ा सवाल यही है कि खदानों से खनिज निकालने के बाद पीछे छूट रहे गहरे गड्ढों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि कोई हादसा होता है, तो जवाबदेही किस अधिकारी या संचालक की तय होगी? ग्रामीणों की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि मौके पर निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here