रावण का पलटवार श्रीराम का स्वरूप धारण कर तीर चलाते ही रावण से छूटे रॉकेट, जलते रॉकेटों की बौछार से मची अफरा तफरी।
धार के टांडा में रावण दहन की खतरनाक परंपरा! जलते रॉकेटों की बौछार से भागती दिखी भीड़, वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल।*
*परंपरा या जानलेवा जोखिम? टांडा में रावण दहन के दौरान भीड़ की तरफ छूटे रॉकेट, बाल-बाल बचते नजर आए लोग।
टांडा/// मध्यप्रदेश के धार जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र टांडा से रावण के पुतले के दहन का एक वीडियो, सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। यहां रावण दहन की एक ऐसी परंपरा देखने को मिलती है, जिसे देखकर लोग हैरान हैं। लेकिन इस परंपरा के बीच अब लोगों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दरअसल, टांडा में रावण दहन के दौरान, जैसे ही भगवान श्रीराम के स्वरूप बने कलाकार का, तीर रावण को लगता है, उसके अंदर से निकलने लगते हैं अनगिनत जलते रॉकेट। देखते ही देखते रावण के अंदर से जलते रॉकेट की बौछार, भीड़ की तरफ बढ़ने लगती है और अपनी जान बचाने के लिए लोग, इधर-उधर भागते नजर आते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिखाई देता है कि, रावण के अंदर से निकलने वाले रॉकेट लोगों के बीच जाकर गिर रहे हैं। यहां तक कि, रावण दहन की प्रक्रिया में शामिल राम का प्रतीकात्मक स्वरूप धारण किए व्यक्ति भी तीर छोड़ते ही सतर्क डरा हुआ ,ओर भागता नजर आता है।
बताया जा रहा है कि, टांडा में रावण दहन का यह भयात्मक तरीका वर्षों से चला आ रहा है। हालांकि, यह परंपरा कब से शुरू हुई, इसकी सटीक जानकारी सामने नहीं आई है।
एक ओर लोग इस आयोजन को परंपरा और उत्साह के साथ देखते हैं, तो दूसरी ओर भीड़ की तरफ तेजी से आते जलते रॉकेट किसी बड़े हादसे की आशंका भी पैदा करते हे। सवाल यह है कि आखिर परंपरा के नाम पर लोगों की जान को जोखिम में डालना कितना उचित है?
अगर इनमें से कोई रॉकेट किसी व्यक्ति को सीधे लग जाए, तो गंभीर चोट लग सकती है। आंखों को नुकसान पहुंच सकता है या कोई व्यक्ति स्थायी रूप से दिव्यांग भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय पहले से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना जरूरी है। इस प्रकार के आयोजन, परंपराओं के नाम पर प्रतिबंध लगना चाहिए। जो सरासर पब्लिक के साथ में जानलेवा है।


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