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Saturday, 4 April 2026

प्रसूता के गर्भाशय में छोड़ा नैपकिन: जिला अस्पताल की सिजेरियन डिलीवरी में लापरवाही उजागर, 14 दिन बाद इंदौर में दोबारा ऑपरेशन कर निकाला

 प्रसूता के गर्भाशय में छोड़ा नैपकिन: जिला अस्पताल की सिजेरियन डिलीवरी में लापरवाही उजागर, 14 दिन बाद इंदौर में दोबारा ऑपरेशन कर निकाला



सरकारी अस्पताल के अभाव में महिला पेट दर्द से तड़पती रही लाजमी तो है जब जान बचाने वाले ही बन जाए मौत के सौदागर

खरगोन से दिग्विजय सिंह पटेल की रिपोर्ट 

खरगोन जिला अस्पताल में 17 मार्च को सिजेरियन डिलीवरी के दौरान मोहनगांव सेल्दा निवासी 30 वर्षीय मनीषा घोरमाडे के गर्भाशय में निपकिन छोड़ने का मामला सामने आया है। लगातार पेट दर्द की शिकायत के बाद हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें इंदौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 14 दिन बाद दोबारा ऑपरेशन कर नैपकिन निकाला गया। वर्तमान में प्रसूता आईसीयू में भर्ती है, और उनकी हालत स्थिर है। मामला सामने आने के बाद इस गंभीर चूक पर कलेक्टर भव्या मित्तल ने सिविल सर्जन डॉक्टर राजकुमारी देवड़ा से रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।



*17 मार्च को डॉक्टर मोहित गुप्ता ने की थी डिलीवरी* 

जानकारी के अनुसार 17 मार्च को जिला अस्पताल में डॉक्टर मोहित गुप्ता ने मनीषा की सिजेरियन डिलीवरी की थी, जिसमें उन्होंने एक बालिका को जन्म दिया था। 21 मार्च को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। प्रसूता ने लगातार पेट में दर्द की शिकायत की, लेकिन उन्हें यह बताया गया कि सिजेरियन ऑपरेशन के बाद ऐसा दर्द सामान्य होता है। 

*हालत बिगड़ने पर ले गए इंदौर आईसीयू में भर्ती है प्रसूता*

जब मनीषा की हालत बिगड़ने लगी, तो परिजन उन्हें इंदौर ले जाने को मजबूर हुए।वहां एक निजी अस्पताल में 14 दिन बाद महिला की दूसरी सर्जरी की गई, जिसमें उनके गर्भाशय से नैपकिन निकाला गया। फिलहाल प्रसूता आईसीयू में भर्ती है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।  


*सिविल सर्जन बोली - छुट्टी के बा

द परेशानी बताने अस्पताल नहीं आई*

सिविल सर्जन डॉ राजकुमार देवड़ा ने बताया कि 17 मार्च को मनीषा घोरमाडे की सिजेरियन डिलीवरी डॉक्टर मोहित गुप्ता ने की थी और उन्हें 21 मार्च को छुट्टी दे दी गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया की छुट्टी के बाद प्रस्तुत अपनी परेशानी बताने अस्पताल नहीं आई थी मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अब बड़ा सवाल यह है कि जब जान बचाने वाले ही मौत के सौदागर बन जाए तो लाजमी तो है। स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल। एक बार फिर जिला अस्पताल सवालों के घेरे में।

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