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Thursday, 26 February 2026

राजकीय मान्यता के साथ ऐतिहासिक रंग में भगोरिया 2026, आदिवासी अंचल में गूंजे उल्लास के नगाड़े

 राजकीय मान्यता के साथ ऐतिहासिक रंग में भगोरिया 2026, आदिवासी अंचल में गूंजे उल्लास के नगाड़े


आदिवासी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक भगोरिया उत्सव 2026 इन दिनों पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के झाबुआ अलीराजपुर धार बड़वानी ओर खरगौन जिलों में ढोल-मांदल की थाप पर जनजातीय समाज झूम रहा है।

यह पर्व होली से सात दिन पहले शुरू होकर होलिका दहन तक चलता है। इस वर्ष भगोरिया की शुरुआत 26 फरवरी 2026 (गुरुवार) – गुजरी हाट से हुई।

🌿 इस साल की खास बातें

🔸 राजकीय उत्सव का दर्जा

मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने भगोरिया को ‘राजकीय उत्सव’ घोषित किया है। अब यह पर्व सरकारी संरक्षण में और भी भव्य रूप से आयोजित हो रहा है, जिससे आदिवासी परंपराओं को नई पहचान मिल रही है।



🔸 परंपरा और आधुनिकता का संगम

गुजरी का हाट धार और खरगोन की सीमा पर होने से यहाँ दोनों जिलों की जनजातीय संस्कृति का अनूठा संगम दिखाई देता है। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आधुनिक व्यवस्थाओं का तालमेल इस बार विशेष आकर्षण बना है।



🔸 ढोल-मांदल की गूंज

हाट बाजारों में सैकड़ों की संख्या में युवा और बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा—चांदी के आभूषण, रंग-बिरंगी पगड़ियां और कुर्तियां—धारण कर मांदल की थाप पर सामूहिक नृत्य कर रहे हैं। पूरा वातावरण उत्साह और उमंग से भर उठा है।



🔸 झूले और खान-पान का आनंद

मेले में झूले, मिठाइयाँ और स्थानीय व्यंजन लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर उत्सव का आनंद ले रहे हैं।



🚦 विशेष इंतजाम

गुजरी और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन ने यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि श्रद्धालु और पर्यटक सुरक्षित वातावरण में उत्सव का आनंद ले सकें।



भगोरिया 2026 केवल एक मेला नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, प्रेम, संस्कृति और सामूहिक उल्लास का जीवंत प्रतीक है, जो परंपरा को आधुनिक पहचान के साथ आगे बढ़ा रहा है।



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