आरोपों की आड़ में तबादला, कोर्ट ने दिखाया आईना धामनोद नगर परिषद सीएमओ के तबादले पर कोर्ट ने लगाई रोक
लोकायुक्त का हवाला बना ढाल, प्रशासन के फैसले पर उठे बड़े सवाल
बिना ठोस कारण ट्रांसफर पर न्यायालय सख्त — लोकायुक्त शिकायतों का जिक्र, फिर भी कार्रवाई संदिग्ध
*धामनोद।* नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी माया मंडलोई के तबादले पर आखिरकार कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए रोक कहते हुए यथावत रखने को आदेश दिया है। यह मामला अब केवल एक ट्रांसफर नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है।
याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत तथ्यों में साफ तौर पर बताया गया कि, तबादले के पीछे कोई ठोस आधार नहीं था, जबकि लोकायुक्त में दर्ज शिकायतों का हवाला जरूर दिया गया। कोर्ट ने इसी बिंदु को गंभीरता से लेते हुए पूछा कि जब शिकायतों पर कोई ठोस निष्कर्ष या दोष सिद्ध नहीं हुआ, तो आखिर इतनी जल्दबाजी में तबादला क्यों किया गया?
दस्तावेजों के अनुसार, याचिकाकर्ता के खिलाफ तीन अलग-अलग एफआईआर और लोकायुक्त शिकायतों का उल्लेख जरूर किया गया । लेकिन न्यायालय ने पाया कि इन मामलों में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे तत्काल तबादले को उचित ठहराया जा सके।
न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप होते और वे प्रमाणित होते, तो कार्रवाई अलग होती। लेकिन केवल आरोपों के आधार पर इस तरह का फैसला लेना नियमों के विपरीत है।
इसी आधार पर कोर्ट ने 10 अप्रैल 2026 को जारी तबादला आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता को पुनः उसी पद पर यथावत रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रतिवादी पक्ष को तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा गया है।
*_हाइलाइट –_*
लोकायुक्त का हवाला, पर सबूत नदारद ।
तीन एफआईआर का जिक्र, लेकिन ठोस आधार नहीं ।
*कोर्ट बोला –* “बिना कारण ट्रांसफर नहीं”।
10 अप्रैल का आदेश फिलहाल बेअसर ।
*_साइड एंगल –_*
क्या लोकायुक्त का नाम सिर्फ दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल हुआ?
बिना जांच पूरी हुए ट्रांसफर का आदेश क्यों?
क्या यह प्रशासनिक मनमानी का मामला है?


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