जाति सूचक गालियां, नौकरी से निकालने की धमकी और खामोश पुलिस धामनोद नगर परिषद में ‘अध्यक्ष प्रतिनिधि’ के नाम पर दबंगई का आरोप
*_धामनोद पुलिस की निष्क्रियता पर कर्मचारी पहुंचे धार पुलिस अधीक्षक की शरण_*
धामनोद//नगर परिषद धामनोद में अनुसूचित जाति–जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के साथ खुलेआम जातिगत अपमान, धमकी और दबाव का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि वार्ड क्रमांक 14 निवासी विष्णु पिता शोभाराम पाटीदार, जो स्वयं को नगर परिषद अध्यक्ष का प्रतिनिधि बताता है, सार्वजनिक स्थानों पर कर्मचारियों को जातिसूचक गालियां देता है और नौकरी से निकलवाने की धमकी देता है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायतों और साक्ष्यों के बावजूद पुलिस थाना धामनोद अब तक एफ आई आर दर्ज नहीं कर पाई है । जिससे पूरे मामले में प्रशासनिक संरक्षण की आशंका गहराती जा रही है।
सार्वजनिक स्थान पर अपमान, 11 नंबर टंकी बनी गवाह
शिकायत के अनुसार 16 जनवरी 2026 की शाम नगर की 11 नंबर टंकी के पास आम लोगों की मौजूदगी में नगर परिषद में कार्यरत अनुसूचित जाति–जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को अपमानित किया गया। आरोप है कि आरोपी ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि वह नगर परिषद में “सब देख लेता है” और जिसकी नौकरी चाहिए, उसे उसकी शर्तें माननी होंगी।
कर्मचारियों और अधिकारी तक नहीं बचे
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि सहायक ग्रेड-2 सुनील वर्मा सहित अन्य कर्मचारियों को नाम लेकर अपमानित किया गया। इतना ही नहीं, नगर परिषद की मुख्य अधिकारी श्रीमती माया मंडलोई के बारे में भी कथित रूप से अभद्र और अपमानजनक टिप्पणी की गई।
*_ऑडियो साक्ष्य होने के बावजूद एफआईआर नहीं –_*
पीड़ित पक्ष का दावा है कि घटना से संबंधित ऑडियो साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिन्हें आवेदन के साथ संलग्न किया गया है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे पहले भी कर्मचारियों द्वारा थाना धामनोद और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शिकायतें दी जा चुकी हैं।
*_पुलिस अधीक्षक से लगाई गुहार –_*
तीन दिन बीत जाने के बाद भी धामनोद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की गई और पुलिस का वही रटा रटाया जवाब जांच की जा रही है । पुलिस की निष्क्रियता को देख हुए नगर परिषद के कर्मचारी शनिवार को पुलिस अधीक्षक के सामने अपनी गुहार लगाने पहुंचे । जहां पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया है कि, मैं थाना प्रभारी से चर्चा कर आपकी शिकायत दर्ज करता हूं ।
*_SC/ST एक्ट की अनदेखी –_*
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह मामला SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें त्वरित एफआईआर और गिरफ्तारी का प्रावधान है। बावजूद इसके कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।
कर्मचारियों में भय, व्यवस्था पर सवाlल
लगातार धमकियों और कार्रवाई न होने से नगर परिषद के कर्मचारियों में भय का माहौल है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होती, तो इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होती।
*_अब बड़ा सवाल यह है कि —_*
क्या ‘अध्यक्ष प्रतिनिधि’ का कथित रुतबा कानून से ऊपर है ?
और क्या धामनोद पुलिस इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करेगी या चुप्पी साध कर बैठी रहेगी ?


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